'सबद-लोक’ हमारी अनियतकालीन पत्रिका है जहाँ हम ‘धरोहर’ स्तंभ को छोड़कर अन्य सभी स्तंभों के लिये सिर्फ़ अप्रकाशित-अप्रसारित रचनाएँ ही लेते हैं। अत: जैसे-जैसे हमें आपकी पत्रिकानुकूल सामग्री प्राप्त होगी, उन्हें देखकर शीघ्र ही यहाँ लगाने का यत्न करेंगे और आपको उसके छपने की सूचना भी देंगे। पत्रिका के विविध स्तंभों के लिये आपकी रचनायें सादर आंमंत्रित हैं। अपनी रचनायें हमें कृपया युनिकोड फॉन्ट में ही उपलब्ध करायें। साथ में अपना फोटो, संपर्क-सूत्र और संक्षिप्त परिचय देना न भूलें। कृपया इस ई-पते पर पत्राचार करें और अपनी रचनायें भेंजें: sk.dumka@gmail.com > निवेदक- संपादक मंडल, ‘सबद-लोक’।

सबद-लोक का सदस्य बनें और नये पोस्ट की सूचना लें:

ईमेल- पता भरें:

  पप्‍पू के बेटे को अपनी बीवी चाहिये

Saturday, January 16, 2010


पप्‍पू आजकल असमंजस में है
उसके बेटे ने कर दी है बगावत
कह दिया है खुलकर
और
दे दिया है अल्‍टीमेटम।

आपकी बीवी के साथ अब
नहीं हो सकता मेरा गुजारा
मुझे तो मेरी बीवी लाकर दो।

पप्‍पू सन्‍न है
पप्‍पू की मां प्रसन्‍न है
और बेटे की आजादी
छिनने ही वाली है।

उसको कोई ये वाली बात
तो बतला दो
स्‍कूटर पर वो
खुद ही घूमेगी और वो
यूं ही चक्‍करघिन्‍नी बनेगा।

10 comments:

Udan Tashtari January 16, 2010 at 7:29 AM  

चकरघिन्नी बनने की ही उम्मीद ही ज्यादा प्रबल है भाई...बचपना ही कहो बच्चे का. :)

हास्यफुहार January 16, 2010 at 7:44 AM  

पुराना नही रहा,
अब तो नया ज़माना हो गया है,
पप्पू सयाना हो गया है.

मनोज कुमार January 16, 2010 at 8:37 AM  

बौद्धिकता का शिकार है
पप्पू होशियार है ?
अपने पैर पर कुल्हारी धर रहा है
करने दीजिये जो कर रहा है
बात तब समझ मे आयेगी
जब चकरघिन्नी खिलायेगी

जी.के. अवधिया January 16, 2010 at 9:00 AM  

"बेटे की आजादी
छिनने ही वाली है।"

पप्पू की चिन्ता जायज है किन्तु वह कुछ भी नहीं कर पायेगा।

Vivek Rastogi January 16, 2010 at 9:08 AM  

पप्पू भी पप्पूपना करता रहता है।

HARI SHARMA January 16, 2010 at 2:26 PM  

बेचारा पप्पू गया काम से
उसकी जाने कितनी पीश्ढीया ऐसे ही पप्पूपना करके भुगतेन्गी.
अपनी लुटिया आप डुबोना अच्छा है पर कभी कभी
( हुल्लड मुरादाबादी )

राज भाटिय़ा January 16, 2010 at 3:51 PM  

पप्पू की चिन्ता जायज है, लेकिन पप्पू बेटे को समझ्ऎ कि बेटा हम हिन्दुस्तानी है, हमारे यहां दादा चीज लेता है पोता भी वर्ताता है, क्यो कि हमारी चीजे मजबुत होती है....:)
कहावत भी तो है"" दादा खरीदे पोता बरते""

महेन्द्र मिश्र January 16, 2010 at 4:00 PM  

पप्पू की चिन्ता जायज है...

baddimag January 16, 2010 at 7:35 PM  

pappu aaj apani duniya me kho gaya..
apne biwi bacchon ki samasyaon me kho gaya
varna tum bhi yaad karo jab pure desh ne khushiyan manai thia ki pappu pass ho gaya ...pappu pas ho gaya

mukesh February 6, 2010 at 2:15 PM  

ye to tey hai ki ab papu ka beta sadi karega , bt kiya papu apni nayi naveli bahu ka swagat kuhsi kuhsi karega.

kiya uako bhi wo padhne ke liye ache school me admision dilwayega.

kiya usko nayi dress la kar dega.

usko wo kuhsiya dega jo wo apne bete ko diya karta tha.

janenge avinash ji ki aglii lekhni me .

tab tak ke liyeek chta sa break


tentannannnnnnnnnn

नीचे बॉक्स में लिंकों को क्लिक कर आप संबंधित पोस्ट को पढ़ सकते हैं -

लिंक-प्रतीक-चिन्ह (LOGO) - सबद-लोक

सबद-लोक

मार्गदर्शन -

* सम्पादन -सहयोग : अरविन्द श्रीवास्तव,मधेपुरा , अशोक सिंह (जनमत शोध संस्थान, दूमका), ,अरुण कुमार झा

* सहायता तकनीकी:अंशु भारती

सबद-लोक का लिंक-लोगो लगायें -

अपनी मौलिक-अप्रकाशित रचनायें कृपया इस पते पर प्रेषित करें -

  • डाक का पता- हंसनिवास, कालीमंडा,
  • हरनाकुंडी रोड,पोस्ट-पुराना दुमका,जिला- दुमका (झारखंड) - 814 101
  • ई-पता = sk.dumka@gmail.com
  • और mail@sushilkumar.net
-:लेखा-जोखा:-

__________

______________

  © Blogger templat@सर्वाधिकार : सुशील कुमार,चलभाष- 09431310216 एवं लेखकगण।

Back to TOP