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  पप्‍पू की याद और रूमाल की गुलाबी गांठ का किस्‍सा

Saturday, November 7, 2009


पप्‍पू के पास एक रूमाल
दिन-भर रखता है जेब में
सुबह बांधता उसमें गांठ
रात को करता है याद।

दिन भर करता धींगामस्‍ती
शाम होते ही आती सुस्‍ती
जब रूमाल की देखी गांठ
कपड़े उतारे आ गई चुस्‍ती।

खाना खाकर लेट गया
और करने लगा याद
नहीं आई दिमाग में
बांधी क्‍यों गुलाबी गांठ ?


रात चार बजे एकाएक
जैसे बिजली कौंध गई
सोना था रात दस बजे
जागरण सुबह चार बजे।


देखा दिमाग के पप्‍पू के
इतनी जोर से ढोल बजे
ढोल की शहनाई की गूंज
आपके कानों में भी गूंजे।

इसे कहें ध्‍यान ?
पप्‍पू की याद हो गई अंतर्ध्‍यान
रूमाल की गुलाबी गांठ का किस्‍सा
पप्‍पू सुबह चार बजे उठ जाता है।

8 comments:

खुशदीप सहगल November 7, 2009 at 5:13 AM  

पप्पू कान्ट स्लीप साला...
ज़रूर है ब्लॉगिंग का मतवाला...

जय हिंद...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक November 7, 2009 at 6:09 AM  

पप्पू बड़े दिलवाला है,
ब्लॉगिंग का मतवाला है!

सुशील कुमार छौक्कर November 7, 2009 at 9:40 AM  

अजी पहेलीयाँ क्यों बूझा रहे हो। साफ साफ कह दो कि पप्पू को .....

RAJNISH PARIHAR November 7, 2009 at 10:26 AM  

ये पप्पू ऐसे ही क्यों होते है?ज्यादा सोच सोच कर परेशां क्यों रहते है...

Mahfooz Ali November 7, 2009 at 11:33 AM  

heheheheh....kya bataun ab ..........? Mera bhi ghar ka naam PAPPU hai.......

मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!

अजय कुमार झा November 7, 2009 at 2:58 PM  

पप्पू गजबे है जी और उतना ही कमाल उसका गांठ है ..गुलाबी गांठ हा हा हा ..मजा आ गया ..

विनोद कुमार पांडेय November 7, 2009 at 3:26 PM  

बड़े जलवे हैं पप्पू भाई के नये गुलाबी रुमाल..वाह बड़ा ही कमाल..बहुत बढ़िया ..

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर November 7, 2009 at 11:54 PM  

पप्पू को ब्लोगिंग का स्वाद नहीं लगाया क्या?

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