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  पप्‍पू सब्‍जीवाला है : ढंग उसका निराला है

Saturday, October 24, 2009


पप्‍पू ने खोल ली है सब्‍जी की दुकान
सब्जियां महंगी हो रही हैं
कमाई की भरपूर संभावना है श्रीमान।


पर आदत से लाचार है
पप्‍पू हमारा खूब मजेदार है
पहले छोले भटूरे की दुकान पर
खूब साल किया है काम
भरपूर एक्‍सपीरियंस है।

वहां ग्राहक से पूछता था
यहीं खाओगे या घर ले जाओगे।

आदत वो आदत क्‍या
जो बदल जाये
आदत से मजबूर है पप्‍पू
अब भी पूछ लेता है
हर खरीदने वाले से
यहीं खाओगे या घर ले जाओगे ?

जैसे सब्‍जी नहीं
बेच रहा हो अचार।

15 comments:

M VERMA October 24, 2009 at 6:50 AM  

हम तो भैया
वही खायेंगे
सडा गला होगा तो
मुह पर मार आयेंगे

खुशदीप सहगल October 24, 2009 at 8:03 AM  

पप्पू अपना तेज़ है...
तभी तो उसका हर जगह क्रेज है...
क्या हुआ जो सब्जी मंडी में लगाता मेज़ है...

जय हिंद...

जी.के. अवधिया October 24, 2009 at 9:07 AM  

गर गाजर मिला तो वहीं खायेंगे
नहीं तो फिर घर ले जायेंगे

ललित शर्मा October 24, 2009 at 9:47 AM  

जय हो पप्पु भैया सब्जी बेचो चाहे अचार
अगर पका कर दोगे तो हम खाने को तैयार

ई हमरा से पकाने का झंझट नही होता है ना।
जै हो पप्पु भैया

संगीता पुरी October 24, 2009 at 10:23 AM  

कहां कहां से आइडिया लाते हैं .. बहुत बढिया लगा !!

Dr. Mahesh Sinha October 24, 2009 at 7:18 PM  

पप्पू पुराण अच्छा चल रहा है

विनोद कुमार पांडेय October 24, 2009 at 9:01 PM  

आदत तो आदत होती है अब एक बार लग गया तो छूटता नही...शुक्र है की पप्पू जूता नही बेच रहे हैं...नही तो हंगामा हो जाता...

सुशील कुमार छौक्कर October 24, 2009 at 10:35 PM  

हमने तो सब्जी खानी छोड दी बस चटनी रोटी खाते है। वैसे ये पप्पू है कौन?

अजय कुमार झा October 24, 2009 at 10:51 PM  

अविनाश भाई ,
ये पप्पू तो सच में कमाल है...कभी करोड पति तो कभी भाजी की ठेली...बहुत मजेदार

HARI SHARMA October 24, 2009 at 11:41 PM  

भैया सब्जी लेन्गे छाटके
मन्डी के भाव
और एक के साथ एक फ़्री भी चाहिये
धनिया मिर्ची और थैली मे रख देना
मे जरा किचिन मे हू
मुन्ने का ध्यान रखना

Mishra Pankaj October 25, 2009 at 1:58 AM  

पप्पू जे के बहाने सच बात , मजा आ गया!!!

शरद कोकास October 25, 2009 at 2:16 AM  

अच्छा है पप्पू घास नही बेचता ।

अविनाश वाचस्पति October 26, 2009 at 12:15 PM  

सभी टिप्‍पणीदाताओं को पप्‍पू ने सादर नमन कहलवाया है।

कमल शर्मा October 26, 2009 at 12:50 PM  

पप्‍पू को शांति प्रिय तरीके से सब्‍जी बेचने के लिए अगले वर्ष नोबेल पुरस्‍कार शांति के लिए दिया जाएगा। तब पप्‍पू का दर्जा ओबामा से ऊपर उठ जाएगा। मेरा भारत...नहीं नही...मेरा पप्‍पू महान।

Akanksha October 26, 2009 at 7:36 PM  

behatreen :)

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