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  हरि शर्मा के गीत -

Sunday, October 4, 2009

 पुनर्प्रस्तुति:हरि शर्मा के गीत          

एक-

तुम मधु ऋतू मे मिल जाओ प्रिये
मैं सपनो का संसार समर्पण कर दूंगा

जब मित्र सभी देखा करते उजियारो को
मैंने जीवन मे सिर्फ अँधेरा देखा है
जब चार दिशा मे गूँज रहा है कोलाहल
मैंने जीवन मे एक रूप जग देखा है


तुम हंसी विखेरो घूमो नाचो गाओ प्रिये
मैं जन्मो का श्रृंगार समर्पण कर दूंगा
जब तारे टिम टिम करते चन्दा चमक रहा
मैंने कुटिया मे घुप्प अँधेरा देखा है


जब गली गली मे धूम मच रही होली की
मैंने दर्पण मे धूल सना मुख देखा है
तुम लिए गुलाल हाथ मे आ तो जाओ प्रिये
मैं सतरंगो से रंगरंगी कर दूंगा

जब रास रंग में डूबी यारों की टोली
मेरे ललाट पर सिर्फ विरह की रेखा है
मेरी नैया तो डूब रही मझधार प्रिये
मैंने कब कब दृश्य तटों का देखा है

तुम निज स्वर मे गाओ मेरे गीत प्रिये
में जीवन का अभिसार समर्पण कर दूंगा।

दो-

सब जगह बिखरा पडा है


लोग तो परेशान हैं कि
जब घर में घुसो देखो
शयनकक्ष से लेकर के
बाहर की बैठक तक
यहाँ वहां सब जगह
सामान बिखरा पडा है

रातों में नभ निहारो
निशा की रियासत में
सैनिक बन दमक रहे
तारे हैं टिमटिमा रहे
राजा से चन्द्रमा का
प्रकाश बिखरा पडा है

दुनिया में घृणा देख
व्याकुल हुआ कवि मन
युद्ध की तो कौन कहे
घरेलू मसलों पर ही
इंसानियत मर रही है
खून बिखरा पडा है

जीवन भी देखो ना
माटी के पुतले में
साँसों का डेरा है
आस का पखेरू है
उसमें भी सपन मेरा
टूटा बिखरा पडा है

-हरि शर्मा,
संपर्क:-- 60 , विद्या पार्क,
एयर्फोर्स एरिया,जोधपुर।

मोबाईल: 09001896079, 09828018586


प्रस्तुतकर्ता-

-सुशील कुमार।

6 comments:

वन्दना October 4, 2009 at 5:42 PM  

sab bikhra pada hai.........bahut hi sundar bhav.

रवि कुमार, रावतभाटा October 4, 2009 at 11:10 PM  

ठीक-ठाक लगे...
अच्छी भावाव्यक्तियां...

अनुपम अग्रवाल October 5, 2009 at 7:12 AM  

तुम निज स्वर मे गाओ मेरे गीत प्रिये
में जीवन का अभिसार समर्पण कर दूंगा।

तुम मधु ऋतू मे मिल जाओ प्रिये
मैं सपनो का संसार समर्पण कर दूंगा

अच्छी अभिव्यक्ति और बेहतरीन भाव

Suman October 5, 2009 at 9:08 AM  

मैं जन्मो का श्रृंगार समर्पण कर दूंगा .nice

रचना दीक्षित October 5, 2009 at 1:23 PM  

तुम मधु ऋतु में मिलने आ जाओ
मैं सपनो का संसार समर्पित कर दूंगा

बहुत ही खूब सूरत भाव. आगे खाने को कुछ कहने को बचा ही कहाँ है

सुरेश यादव October 5, 2009 at 11:10 PM  

हरि शर्मा को अच्छे गीतों के लिए और आप सुशील कुमार को इस प्रस्तुति के लिए बधाई 09818032913

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