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  अरविन्द ठाकुर की कवितायें

Friday, July 10, 2009

अरविन्द ठाकुर

परिचय-
पिता- बलेन्द्र नारायण ठाकुर ’विप्लव’
जन्म- १४ फरवरी १९५७, सुपौल, बिहार ।
हिन्दी और मैथिली में लेखन। प्रकाशित पुस्तक-
- धरती टूट रही है/ धरती टूटि रहल अछि (हिन्दी एवं मैथिली में कविता संग्रह)
अन्हारक विरोध में मैथिली कथा संग्रह प्रकाशित ।
-भारतीय साहित्य, इन्द्र्प्रस्थ भारती, भाषा-भारती, समकालीन परिभाषा, बया, विपक्ष, सरोकार, कला, अक्षत, मुहिम, वर्तमान साहित्य, संवेद, कर्णामॄत, वैदेही, मिथिला मिहिर, मैथिली अकादमी पत्रिका आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ सह अनुवाद प्रकाशित। साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा "ट्रेवल ग्रांट टू आथर" योजनान्तर्गत महाराष्ट्र भ्रमण सहित साहित्य अकादमी की विभिन्न गतिविधियों में। भागीदारी सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन एवं इंडियन रेड क्रास सोसाइटी, सुपौल शाखा में योगदान।

संपर्क- विप्लव भवन,
सुपौल (बिहार)
- मो -09431091548

कवितायें:

एक-

मैं खुश हूँ

डेगचियाँ भर स्वर्ण मुद्राएं
टोकरियाँ भर-भर हीरे जवाहरात
पेटियाँ भर-भर रुपल्लियाँ
और किस-किस में
जाने क्या-क्या


ले - ले भागते रहे लोग
जाने कहां - कहां

मेरी हथेली पर तो सिर्फ़
धान का एक दाना है...

सामने दूर तक फैली ज़मीन...

और मै खुश हूँ
कि मुझे कहीं जाना नहीं है ।

***


दो-

नजर नहीं आता है दुश्मन


जाने कौन-कौन रंग ओढ़
रुप बदलती है हवाएँ


कि कोई एक चेहरा
एक चेहरे में
थोड़ी देर भी ठहरता नहीं

अभी देखो
बहुत कुछ मुश्किल है चिन्हित करना
ऐसे समय में लक्ष्य को

दिल में हमारे
प्रतिहिंसा तो धधकती है
पर सामने
कोई दुश्मन नज़र नहीं आता
...

10 comments:

HARI SHARMA July 11, 2009 at 12:18 AM  

पहली कविता मे़ जहा़ भीड से हटकर सन्तोष की बात कही है वहा़ दूसरी मे़ तमाम आपाधापी के बीच अहिन्सा को आत्म्सात कर लिया है. दोनो़ कविताओ़ मे़ नव्यता है.

PRAN SHARMA July 11, 2009 at 1:34 AM  

Dono kavitayen achchhee hain.

Udan Tashtari July 11, 2009 at 6:02 AM  

अरविन्द जी की बड़ी दमदार रचनाऐं पढ़वाईं. आनन्द आ गया. आपका बहुत आभार.

संगीता पुरी July 11, 2009 at 8:04 AM  

बहुत बहुत धन्‍यवाद आपका .. इतनी अच्‍छी अच्‍छी रचनाएं पढवायी .. बहुत बढिया !!

सुशील कुमार July 11, 2009 at 8:34 AM  

मैं हरि शर्मा जी के इस वक्तव्य से सहमत हूँ कि अरविद ठाकुर की ये रचनायें भीड़ से हटकर है। कविता की कहन में एक नयी लोच भी है।

Anshu Bharti July 11, 2009 at 8:36 AM  

छोटी पहल की दिल को छूने वाली।

Ashok July 11, 2009 at 8:38 AM  

kavitaaye sochane par majaboor karatee hain.

अरविन्द श्रीवास्तव July 11, 2009 at 9:32 AM  

अरविन्द जी ने कम शब्दों जो कहा वह स्तुत्य है, बेहतरीन कविताएं, गागर में सागर, अरविन्द जी के साथ आपको भी बधाई.......शुभकामनाएं.........

रंजना July 11, 2009 at 1:04 PM  

man ko sukoon pahunchati bahut hi sundar kavitayen.....aabhar aapka.

परमजीत बाली August 5, 2009 at 7:41 PM  

बढिया रचनाएं प्रेषित की हैं आभार।

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