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  पवन शान्त नहीं है / त्रिलोचन

Tuesday, June 2, 2009

आज पवन शांत नहीं है श्यामा
देखो शांत खड़े उन आमों को
हिलाए दे रहा है
उस नीम को
झकझोर रहा है
और देखो तो
तुम्हारी कभी साड़ी खींचता है
कभी ब्लाउज़
कभी बाल
धूल को उड़ाता है
बग़ीचों और खेतों के
सूखे तृण-पात नहीं छोड़ता है
कितना अधीर है
तुम्हारे वस्त्र बार बार खींचता है
और तुम्हें बार बार आग्रह से
छूता है
यौवन का ऎसा ही प्रभाव है
सभी को यह उद्वेलित करता है
आओ ज़रा देर और घूमें फिरें
पवन आज उद्धत है
वृक्ष-लता-तृण-वीरुध नाचते हैं
चौपाए कुलेल करते हैं
और चिड़ियाँ बोलती हैं
आओ श्यामा थोड़ा और घूमें फिरें ।

15 comments:

अविनाश वाचस्पति June 5, 2009 at 7:58 PM  

यौवन को फलों की उपमाएं प्रदान कर
कड़वे नीम से उसको शांत करने का
आपका प्रयास उद्वेगों को निष्‍चेष्‍ट तो
नहीं कर पाएगा और न उनकी उद्विग्‍नता
में कमी ला सकेगा परन्‍तु यौवन की
फलिक उपमाएं और उनके ऐसे मान
अद्भुत विचार संचार की सृष्टि करते हैं।

गिरिजेश राव June 6, 2009 at 8:26 PM  

नर नारी की मिलन और साहचर्य की सनातन इच्छा का प्रकृति के बहाने अच्छा और सरल सादा सा वर्णन


बहुत ही सार्थक पहल। साधुवाद।

AlbelaKhatri.com June 6, 2009 at 8:53 PM  

adbhut ! abhinav ! anupam !

कुमार मुकुल June 6, 2009 at 9:49 PM  

प्रिय भाई, सबद लोक का मुखडा बहुत आकर्षक लगा कविता भी अच्‍छी लगी

नारदमुनि June 7, 2009 at 7:10 AM  

bhavpurn. narayan narayan

प्रदीप कांत June 7, 2009 at 10:53 AM  

पवन का शांत न होना मन को कभी अक्सर अशांत कर देता है.
अच्छी कविता.

Nirmla Kapila June 10, 2009 at 9:57 PM  

bahut sundar rachna hai magar rang aur shabad chhote hone ke karan padhne main mushkil lagati hai aabha

श्याम सखा 'श्याम' June 11, 2009 at 8:54 AM  

आपका यह ब्लॉग बहुत पसन्द आया ।त्रिलोचन अपने समय से पहले के कवि थे।इन पर मेरी एक श्रद्धांजलि जोम कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई webduniya.com par upalabdh है
मेरे ब्लॉग्स
http//:gazalkbahane.blogspot.com/ पर एक-दो गज़ल वज्न सहित हर सप्ताह या
http//:katha-kavita.blogspot.com/ पर कविता ,कथा, लघु-कथा,वैचारिक लेख पढें

श्याम कोरी 'उदय' June 11, 2009 at 11:46 AM  

... umdaa rachanaa !!!!!

अरविन्द श्रीवास्तव June 14, 2009 at 6:36 PM  

आपमें जो उत्साह है वह हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है, बेहद खुश हूँ, आपके पहल को हमारा सहयोग मिलता रहेगा……।

संगीता पुरी June 16, 2009 at 12:54 AM  

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Abhinav gatha July 19, 2009 at 4:21 PM  

shabd lok dekkha pdhkar achcha laga. sahitya ke kshetra mein aapka yah pryas sarahaneya hai.patrika ke safalata ke lieye meri shubhkamnyen.

Abhinav gatha July 19, 2009 at 4:21 PM  

shabd lok dekkha pdhkar achcha laga. sahitya ke kshetra mein aapka yah pryas sarahaneya hai.patrika ke safalata ke lieye meri shubhkamnyen.

Abhinav gatha July 19, 2009 at 4:23 PM  

shabd lok dekkha pdhkar achcha laga. sahitya ke kshetra mein aapka yah pryas sarahaneya hai.patrika ke safalata ke lieye meri shubhkamnyen.

Anonymous January 3, 2010 at 2:46 AM  

Nice post! GA is also my biggest earning. However, it’s not a much.

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